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TEA

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 चाय की चुसकियो सी सुबह से शाम होती है,  जिदंगी यूँ ही तमाम होती है।  घूम रहा है समय का पहिया कुछ इस तरह,  बढ़ रही है उम्र, पर घट रहा है फासला जिदंगी और मौत का।  रोज  एक नई सुबह, एक नई चुनौती देती ये  जिंदगी,  मौसम सी रंग बदलती ये जिंदगी।  कभी लगती  गरमी की चुभती धूप सी,  कभी लगती सरदी की बरफीली ठंडी हवा सी कभी लगती सावन के फूलों सी रंगीन,  कभी लगती पतझड़ के सूखे पत्तों सी बेरंग कभी लगती बारिश की सौधी खुशबू सी,  हर पल रंग बदलती ये जिंदगी।  अंत में लगाया हिसाब, तो जाना ना कुछ खोया, ना कुछ पाया सब कुछ, सब रिश्ते नाते, धन दौलत  इस धरा की है और इस धरा पर ही रह जानी है। खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है।  कर अच्छे कर्म, ले भगवान् का नाम  छोड़ दे दुनिया की मोह माया,गर जीतनी  है जिदंगी की जंग। 

सुकून(peace)

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सुकून ऐ सुकून तू कहाँ मिलता है, कया कोई तेरा ठिकाना है।  ढूँढा तुझे हर जगह, पर पता नहीं तू कहाँ मिलता है।  ढूँढा तुझे ऊचे पहाडो़ में, और बहती नदियों में।  ढूँढा तुझे समतल राहों में, और झरझर गिरते झरनो में।  ढूँढा तुझे उगते सूरज की किरणों में, और चाद की शीतलता में।  ढूँढा तुझे घने वृक्षों की छाव में, और सुऺदर फूलों की खुशबू में।  ढूँढा तुझे पंछियों की चहचहाट में, और मासूम पशुओं के प्यार में।  पर पता नहीं तू कहाँ मिलता है, कया कोई तेरा ठिकाना है।  ढूँढा तुझे मंदिरों में ,और मस्जिदों में।  ढूँढा तुझे मोटी मोटी किताबों में, और टीवी चैनलों में।  ढूँढा तुझे अपने मोबाइल में, और यू ट्यूब चैनलों में।  पर पता नहीं तू कहाँ मिलता है, कया कोई तेरा ठिकाना है।  पूछा सब लोगों से,पूछा साधु संतों से।  पर वो तो तुझे ही ढूंढ रहे थे, तेरा पता ही पूछ रहे थे।  ॳत में जाना, सुकून तो कहीं बाहर नहीं है, ये तो अपने अंदर ही है।  ये तो एक अहसास है, जिसको ढूँढते है सब बाहर।  जो मिला, उसी में कर संतोष,  आज की सोच, कल की न सोच जो बीत ...

वाणी

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 वाणी  वाणी है,मुख से निकले हुए कुछ शब्द जो मीठी भी  होते है, और कडवे भी होते है।  शब्द तीर भी है, तलवार भी है कर देते हैं रिश्ते तार तार, कर देते हैं आत्मा छलनी बार बार।  शब्द घाव भी है, शब्द मरहम भी है।  शब्द देते ठऺडे पानी सी शीतलता भी, लगते फूलों के झरने से।  शब्द करेले से कडवे भी, और चीनी से मीठे भी।  रिश्तो में घोलते कडवाहट भी और रिश्तो मे घोलते मिठास भी।  जैसे होते नहीं वापस कमान से निकले हुए तीर वैसे होते नहीं वापस मुख से निकले हुए शब्द।  इस लिए कहते हैं, बोलने से पहले दस बार सोचो। अच्छा सोचो, अच्छा बोलो।

घर (home)

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 घर ईट और गारे से बनते हैं मकान,  रहता है जिसमें हर सुख सुविधा का सामान।  पऺरतु मकान बनता है घर, परिवार से,  परिवार में रहने वालो के प्यार से,  आपस में सदभाव से, सदव्यवहार से,  जहाँ होता है माँ का दुलार, पापा की फटकार,  बच्चों की नादानियां, दादा दादी की पुचकार।  होती है कभी कभी तू तू मै मै और तकरार,  खडी हो जाती है गलतफहमियो की दीवार।  देर नही लगती बनने मे घर को ईट, गारे का मकान, रह जाता है वहाँ सिर्फ साजोसामान, खो जाता है कहीं, रात दिन का सुकून और चैन। घर को घर बनाने के लिए जरूरी है त्याग, विशवास, सदभाव, और आपस में प्यार।

अजनबी

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 अजनबी अजनबी से है रिश्ते सारे, इन रिश्तों की भीड़ में।  कहने को है सारे अपने, पर है सारे अजनबी  ।  कुछ है खून के रिश्ते, कुछ है अपने पन के रिश्ते।  कुछ है मतलब के रिश्ते, कुछ है फर्ज के रिश्ते।  कुछ है इऺसानियत के रिश्ते, कुछ है जरूरत के रिश्ते।  कहने को सारे अपने ,पर है सारे अजनबी  ।  आता है बच्चा जब धरती पर, न जाने बनते हैं कितने ही अनगिनत रिश्ते।  दादा दादी का रिश्ता, नाना नानी का रिश्ता।  माँ बाप का रिश्ता, भाई बहन का रिश्ता।  मौसा मौसी का रिश्ता, चाचा चाची का रिश्ता।  न जाने बनते हैं कितने ही अनगिनत रिश्ते।  मिलता है ढेर सारा प्यार और दुलार इन अनगिनत रिश्तो से।  पंरतु पैसा, सवार्थ, और शायद समय का चक्र बना देता है इन प्यार भरे रिश्तो को अजनबी।  कहने को है सारे अपने, पर है सारे अजनबी।  एक ही है रिश्ता  सच्चा जो होता नहीं कभी अजनबी, वो है आत्मा से परमात्मा का रिश्ता, ईश्वर से प्यार का रिश्ता,  जो पार लगाता है इस जीवन की नैया को, जन्म से मृत्यु तक इन अजनबी रिश्तों की भीड़ में।

नई खुशी

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  हुई उस ईश्वर की ऐसी ईनायत, की घर  आई मेरे एक नन्ही परी,  नाम है जिसका ईनायत।  लेकर आई अपने साथ नई खुशियाँ, नई उम्मीदे, नई उमगे।  करती हू लख लख शुकराना उस ईश्वर का, जिसने भर दी झोली खाली।  आई है लेकर माता का रुप, नाम है जिसका ईनायत ।  6/4/2023 बडी माँ इन्दू

अहसास(feelings)

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  अहसास शायद न रहेगे जिस दिन, होगा अहसास उस दिन।  तिल तिल कर बनाया घोसला, उस घोसले के होने का होगा अहसास किस दिन।  पाई पाई जोड़ चलाई गृहस्ती, उस गृहस्ती के होने का होगा अहसास किस दिन।  कमर तोड़ की मेहनत, देखने को एक झलक खुशी की, उस खुशी के होने का होगा अहसास किस दिन,  शायद न रहेगे जिस दिन, होगा अहसास उस दिन।  भरसक किए पृयास जोडने को एक एक रिश्ते के तार, उस रिश्ते के होने का होगा अहसास किस दिन।  अपनी इच्छाओ, उम्मीदों को छोड़ लगाई तुमसे उम्मीद, उन उम्मीदों के होने का होगा अहसास किस दिन।  शायद न रहेगे जिस दिन, होगा अहसास उस दिन।  होती है गलती हर इंसान से, ढूंढ लेता है गलती वो तो भगवान मे, उस गलती को बार बार गलती कहने का होगा अहसास किस दिन।  गर न हुआ अहसास, तो होगा पछतावा उस दिन, न रहेगे शायद जिस दिन।

धूप और छाव,

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 धूप और छाव,  कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,  हर सुख के बाद आता है दुख और हर दुख के बाद आता है सुख जैसे हर दिन के बाद आती है रात और हर रात के बाद आता है दिन किसी की रात लम्बी तो किसी का दिन लम्बा किसी का दुख ज्यादा तो किसीका सुख ज्यादा गर न हो रात, तो दिन का अहसास नही होगा गर न हो दुख, तो सुख का अहसास नही होगा यही है नियम प्रकृति का, और जीना है सबको इसके साथ कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,  आती है जीवन मे नित नयी समस्या, लगते है नित नये आरोप, प्रत्यारोप लेकिन आती है जीवन मे फिर नयी सुबह आता है नया सवेरा लेकर उम्मीद की नयी किरण कर भरोसा अपने ईश्वर पर, चल अपने कर्मपथ पर निभा अपने सारे फर्ज ईमानदारी से रख कर हिम्मत और विश्वास  मिलेगी  मजिलं जरूर, चाहे आये अडचने हजार कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,                     Indu gupta

चिन्ता और चिता तक का सफ़र

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 चिन्ता और चिता तक का सफ़र चिंता और चिता मे है अन्तर सिर्फ़ एक बिन्दी का,  चिन्ता है शुरुआत और चिता है अन्त , पहुँचा देती है ये चिन्ता ही चिता तक! हम सोचते रहते है कि हाय क्या होगा,कैसे होगा डूबे रहते है इस चिन्ता मे ही हर पल, परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,कयोंकि नहीं है फ़ुरसत करने  से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! चिन्ता लाती है तरह तरह की बीमारियाँ  होती है सुगर,बढ़ता है ब्लड प्रेशर ,होता है डिप्रेशन  खाता है धक्के डाक्टरों के ,लगाता है लाइनें अस्पतालों मे बढ़ते है ख़र्चे बीमारी मे और दवाइयों मे परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,क्योंकि नहीं है फ़ुरसत करने  से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! छोड़ दे इस चिन्ता को ,छोड़ दे सब अपने ईश्वर पर, करम कर ,चल सच्चाई के रास्ते पर मेहनत कर ,हो जाएँगे सब काम तेरे जैसा करेगा करम ,मिल जाएगा वैसा फल, विश्वास कर और समझ इस चिन्ता और चिता के अन्तर को!

माँ(mother,mom)

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 माँ(mother,mom) माँ, मदर, मॉम ये नहीं है कोई शब्द, ये तो है सिर्फ एक एहसास प्यार का,ममता का भेजा है ईश्वर ने जिसे अपने रूप मे धरती पर, माँ जो सिर्फ जानती है देना, नहीं है उसकी डिक्शनरी मे कोई शब्द लेना   पालती है बच्चों को अपने खून पसीने से, सींचती है छोटी छोटी मासूम कलियों को अपने पसीने से, करती है परवाह अपने बच्चों की आख़री सांस तक, चाहे दुनिया छोड़े उसका साथ,या शरीर खुद का छोड़े उसका साथ नहीं छोड़ती  वो साथ कभी अपने बच्चों का, खड़ी रहती है वो बनकर ढाल उन बच्चों की, चाहे वो बच्चे भी छोड़ दे उसका साथ, परन्तु वो नहीं छोड़ती साथ कभी अपने बच्चों का, क्योंकि वो है माँ, भेजा है ईश्वर ने जिसे अपने रूप मैं धरती पर! माँ है एक रूप निश्छल, निस्वार्थ प्यार का, ममता का  माँ दुआ भी है, माँ दवा भी है, गिरता है बच्चा, पुकारता है माँ, रोता है बच्चा, तो रोती है माँ , हँसता है बच्चा, तो हंसती है माँ ढूढती है उन बच्चों मैं अपनी हंसी माँ, मदर, मॉम ये  नहीं है कोई शब्द, ये तो है सिर्फ एक एहसास प्यार का,ममता का!               Indu gupta

साथ साथ(eternal bondings)

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साथ साथ छूट रहा है धीरे धीरे सब अपनों का साथ कुछ छूट गए, कुछ रूठ गए, और कुछ चले गए उस पार उस पर कुछ ऐसी चली हवा विनाश की, आई महामारी, हुआ महायुद्ध ऐसा उज़ड गए आशियाने, मच गयी त्राहि हो रहा विनाश सृष्टि का, छाया है मातम जैसा लेकिन कहते हैं यही हैं नियम प्रकृति का आती हैं पतझड़, गिरते हैं पत्ते शाखाओ से आती हैं बसंत बहार, फुटती हैं नयी कोपले खिलते हैं फूल, होती हैं ज़िन्दगी गुलो गुलज़ार बनते हैं नये रिश्ते, आती है ज़िन्दगी मे फिर से नयी बहार लोग आते हैं, लोग चले जाते है नहीं रुकता कोई किसी के लिए, नहीं रुकता ये समय, नहीं रुकते ये सूरज, चाँद सितारे चलता रहता है ये आवागमन का चक्र सालो साल ज़ीना है हम सभी को इसी नियम के साथ प्यार, विश्वास, हिम्मत और  के साथ!

यादे(memories)

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                      यादे बहुत याद आती हैं वो बचपन की हसीन यादे, दादी नानी के किस्से कहानियों की यादे, भाई बहनो के छोटे छोटे झगड़ो की यादे, फिर रूठने और पापा के मनाने की यादे, साथ साथ सोने जागने, पढ़ने, हसने, खेलने की यादे, रोज रात को दादा जी को पहाड़े सुनाने की वो यादे, सबका मिलकर T. V देखना और फिर सीट के लिए झगड़ने की यादे, सबका मिलकर गुड्डे गुड़िया का ब्याह रचाने की यादे, बहुत याद आती हैँ वो बचपन की हसीन यादे! कहीं खो गए हैं ये प्यारे रिश्ते इस ज़िन्दगी की आपा धापी मे, बिखर गए है संयुक्त परिवार, नहीं है समय किसी के पास, नहीं बचे हैं सच्चे रिश्ते देने को उसका साथ, अपने अपने T.V और अपने अपने मोबाइल है सबके पास,  सोशल मीडिया है देने को उनका साथ, करते हैं पोस्ट हँसते हुए फोटो, और देखते हैं लाइक्स, पर अंदर से हैं सब अकेले, हैरान, परेशान, बस मन के किसी कोने मे बची हैं बचपन की यादे बहुत याद आती हैं वो बचपन की हसीन यादे!

सफर(journey of life)

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  सफर ज़िन्दगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं! शुरू हुआ ज़िन्दगी का सफर, आया बचपन बिना किसी चिंता के, बेपरवाह, खेलते कूदते माँ बाप की छत्रछाया मे, भाई बहनो के प्यार मे, कब बीत गया बचपन, कब बीत गया बचपन! आई जवानी, लेकर आई नई उमंगे, नया ज़ोश,नये हौसले, कुछ कर गुजरने की चाहतो के साथ, मिला नया घर, नये लोग, और मिली बहुत सी ज़िम्मेदारियां, फिर से आई नयी रौशनी जीवन मे,  लौटा फिर से बचपन , छोटे बच्चों की किलकारियों मे, लेकिन अब पलट चुका था पासा, अब थे तुम माँ बाप और तुम पर थी ज़िम्मेदारयां, एक एक तिनका ज़ोड बनाया घोंसला, आई कितनी ही आंधीया, आये कितने ही तूफ़ान पर आंच न आने दी अपने आशियाने पर, इसी भाग दौड़ मे, कब बीत गयी जवानी, कब बीत गयी जवानी!  और अब आया बुढ़ापा, बडे हुए बच्चे, बदला वक्त, बदलते हुए वक्त के साथ देखा बदलते हुए रिश्तों को, देखा बदलते हुए लोगो के नज़रिये को, देखा अपनों को होता हुए पराये, देखा अपने शरीर को भी होता हुए पराये, लगने लगी तरह तरह की बीमारियां, और बढ़ने लगा डॉक्टरो का साथ, फिर से ज़ुटाया ज़ोश, उठाया पेन और शुरू किया पढ़ना और पढ़ाना, शुरू किया पूरा कर...

कौन गलत ,कौन सही

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  कौन गलत, कौन सही   तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही, हर पल हर क्षण सोचता है हर इंसान यही, टूट जाये कितने ही दिल, बिखर जाये कितने ही रिश्ते, नहीं है परवाह किसी बड़े की, नहीं है लिहाज किसी छोटे का क्योंकि उसे तो हर पल हर क्षण लगता है यही तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! जिए जा रहा है अपने अहंकार में, अपने आप को ऊँचा रखने की चाह में, ताउम्र अपने को सही साबित करने की कोशिश में भूल जाता है कौन गलत,कौन सही रहता है हर समय हैरान, परेशान, डूबा रहता है चिंताओं के भंवर में, हो जाता है तरह तरह की बीमारियों का शिकार, भागता रहता है हर समय भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे, छोड़ कर कहीं अपने बेशकीमती रिश्तो को कहीं पीछे, क्योंकि उसे तो हर पल लगता है यही, तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! क्यों नहीं झाँकता वह अपने अंदर, क्यों नहीं ढूंढ़ता अपनी गलतियों को, क्यों नहीं माफ़ी मांगता अपनी भूलों की, क्यों पड़ा है इस फेर मे,की कौन गलत कौन सही, क्यों नहीं कहता मैं गलत तुम सही, मैं गलत तुम सही! अगर आज सब छोड़ दे इस फेर को, की कौन गलत कौन सही, तो हो जाये इस दुनिआ से दूर सारी परेशानिया, हो जाये सब जगह शांति और प्...

विनाशकारी कोरोना

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विनाशकारी कोरोना            कब अंत होगा, कब अंत होगा,कब अंत होगा इस कोरोना का, हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! मचा है आंतक चारों ओर,उठ रही हैँ सिसकियो की आवाज़े चारों ओर, आ रहा है रात दिन एम्बुलेंस का शोर, लील ली हैँ कितनी ही ज़िन्दगिया, कर रहे हैँ लोग त्राहि त्राहि हर ओर! हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! ख़तम हो रही है ऑक्सीजन, नहीं बची है सांस, नहीं है जगह किसी अस्पताल में, नहीं बचने की कोई आस, लगी है लम्बी लम्बी कतारे शमशान घाटों में, नदियों में बह रही लोगो की लाश, मची है लूट खसोट हर ओर, बेच दी है आत्मा और दीन ईमान, नोच रहा है इंसान इंसान को गिधो  की तरह, छाया है मातम हर घर में, पसरा है स्नाटा सड़को पे, हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! लेकिन देना तो पड़ेगा जवाब उस ईश्वर के दरबार में, क्यों नहीं लेता ज़िम्मेदारी कोई भी नेता इतनी मौतों का, बस चल रहा है दौर आरोप प्रत्यारोपों का, कोई तो पूछे उन लोगो से ज़िन लोगो ने खोया अपनों को,हो गए कितने ही बच्चे अनाथ, हर एक के मन में है यही स...

Breathe

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              सांस टूटती हुई साँसे,डूबती हुई आस पता नहीं कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी आज! ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस.! टुकुर टुकुर  अश्रु भारी आँखों से निहारते है हर किसी को, शायद मिल जाये कहीं से कोई आस.! भाग रहा था हर इंसान अपने अहम् में, बना खुदगर्ज, पैसे की चका चौँघ में, कर रहा था अपने लिए इकठा हर ऐशोआराम का सामान.! लेकिन आज एक छोटे से वायरस ने दिखा दी उसे उसकी औकात, रह जायेगा सब यहीं जब निकल जाएगी उसकी सांस.! करते हैँ हम प्राथना उस ऊपर वाले से, जिसने दर्द दिया,वही निवारण देगा, वही डूबती हुई नैया को सहारा देगा.! नहीं है किसी इंसान के बस की बात, क्योंकि ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस..

What is life

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             What is life जिंदगी क्या है, क्यों है और किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन में! कभी लगती ये ज़िन्दगी आकाश सी, तो कभी लगती धरती सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी कल कल बहती नदी सी, तो कभी लगती रेतीले मैदानों सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी पहाड़ो सी, तो कभी लगती गहरी खाई सी! कभी लगती कटीली झाड़ियों सी, तो कभी लगती फूलों के बाग़ सी! ज़िन्दगीक्या है, क्योंकि है, किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन मे! कभी लगती ये ज़िन्दगी बहार सी, तो कभी लगती पतझड़ के सूखे पत्तों सी! ज़िन्दगी दिखाती है इतने रंग, इतने मौसम की, कभी लगती ये ज़िन्दगी एक आशा की किरण सी,तो कभी लगती उलझनों से भारी मुश्किल डगर सी! क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ ज़िम्मेदारियां पूरी करने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ घर गृहस्थी समालने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ सुलझे अनसुलझे रिश्ते सभालने का, क्या हम खो गए है कहीं इस मुश्किल भरे सफर में, नहीं पता किसी को कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी हमें एक दिन, बस हमें तो प्यार से, विश्वास से, सब्र से, चलते जाना है, चलते जाना है, चलते जाना है!

Numbers (नंबरो की भाषा)

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                             नंबरो की भाषा कहते है प्रकृति का कन कन कुछ बोलता है, हर एक की है अपनी अलग अलग बोलो, अपनी अलग अलग भाषा! इंसान की है अपनी बोली, पशु पश्चिकयो की है अपनी बोली, पेड़ पौधों की भी होती है अपनी बोली, हर एक की है अपनी अलग अलग बोली, अपनी अलग अलग भाषा! 26 के 26 वर्ण माला के अक्षरों की भी है अपनी अलग बोली, 1 से 9 नंबरो की भी है अपनी अलग अलग बोली, नंबर 1 कहता है मैं हूँ राजा,  करता हूँ सबके दिल पर राज, है नंबर 2 मेरी रानी, चमकते है हम सूरज चाँद की तरह और भर देते है उजियारा! नंबर 3 और नंबर 6 है दो गुरु जिनमे रहता है हमेशा छत्तीस का आंकड़ा, क्योंकि एक है देव गुरु और एक है देत्या गुरु! समझते है दोनों एक दूसरे से ऊपर अपने को, परन्तु देते है दुनिया को शिक्षा, दीक्षा,और ग्लैमर! नंबर 4 और नंबर 7 है राहु और केतु, जो है एक शरीर के दो हिस्से,एक है सर और एक है धड! एक बनाता है रोबिनहुड और एक बनाता है अध्यात्मिक ! नंबर 5 और नंबर 8,है राजा के दो पुत्र, एक है राजकुमार और एक है जज, राजकुमार करता है सब बैलेंस औ...

Happiness

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           ख़ुशी मै परेशान, मै परेशान, मै बहुत परेशान हर कोई कहता है मै बहुत  परेशान  शायद ढूंढ रहा है हर कोई ख़ुशी, कहीं तो मिलेगी ये ख़ुशी, शायद गुम है किसी कोने मे ये ख़ुशी, ख़ुशी क्या कोई चीज है जो मिल जाएगी किसी कोने मे, इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! भूखे को मिलती हे खुशी दो रोटी मे, नंगे को मिलती हे ख़ुशी दो कपड़ो  मे प्यासे को मिलती है ख़ुशी दो घूँट पानी मे ठण्ड से सिकुड़ते हुए इंसान को मिलती हे ख़ुशी आशियाना मिल जाने मे स्टूडेंट को मिलती है ख़ुशी अच्छे मार्क्स आने मे बूढ़े माँ बाप को मिलती है ख़ुशी बच्चों के  प्यार के दो बोल मे नेताओं को मिलती है ख़ुशी कुर्सी मिल जाने मे काम से घर थके हुए आने पर मिलती है ख़ुशी पत्नी और बच्चों की प्यारी मुस्कान मे क्योंकि इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! नहीं है अंत इस ख़ुशी का जो मिलती है भौतिक सुख सुविधाओं  मे ढूढना है  गर इस ख़ुशी को, तो ढूंढो अपने अंदर कहीं नहीं है छुपी,ये ख़ुशी किसी कोने मे ख़ुशी है छुपी यहीं अपने अंदर क्योंकि ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! ख़ुशी मिलती है चिंता छोड़ देने मे ख़ुश...

मै हार नहीं मानूगी

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 मै हार नहीं मानूगी मै हार नहीं मानूगी ,मै हार नहीं मानूगी मै इस ज़िन्दगी से हार नहीं मानूगी! ले कितनी ही परीक्षाएं  ये ज़िन्दगी पर मै हार नहीं मानूगी! न टूटऊंगी, न झूंकगी,मैं भी ज़िद पर अड़ी रहूँगी पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! आँए कितने ही उतार चढ़ाव या कितने ही  आंधी तूफ़ान, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! लोग दे कितनी ही बुराईया, पर मै ना डरूंगी ना रुकूगी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! ज़लती रहूँगी एक छोटे से दिए की  तरह इस तूफ़ान मे भी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! भरोसा है मुझे  अपने उस भगवान पर और अपने आप पर, वो डूबने नहीं देगा मेरी छोटी सी नाव को, नहीं छोड़ेगा मुझे इस मंझदार मे! क्योंकि ये ज़िद है मेरी,मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी!