TEA
चाय की चुसकियो सी सुबह से शाम होती है,
जिदंगी यूँ ही तमाम होती है।
घूम रहा है समय का पहिया कुछ इस तरह,
बढ़ रही है उम्र, पर घट रहा है फासला जिदंगी और मौत का।
रोज एक नई सुबह, एक नई चुनौती देती ये जिंदगी,
मौसम सी रंग बदलती ये जिंदगी।
कभी लगती गरमी की चुभती धूप सी,
कभी लगती सरदी की बरफीली ठंडी हवा सी
कभी लगती सावन के फूलों सी रंगीन,
कभी लगती पतझड़ के सूखे पत्तों सी बेरंग
कभी लगती बारिश की सौधी खुशबू सी,
हर पल रंग बदलती ये जिंदगी।
अंत में लगाया हिसाब, तो जाना
ना कुछ खोया, ना कुछ पाया
सब कुछ, सब रिश्ते नाते, धन दौलत
इस धरा की है और इस धरा पर ही रह जानी है।
खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है।
कर अच्छे कर्म, ले भगवान् का नाम
छोड़ दे दुनिया की मोह माया,गर जीतनी है जिदंगी की जंग।

Baht hi badiyaa ma'am 🫖☕
ReplyDeleteVery nice 👏👏👏👏
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