धूप और छाव,
धूप और छाव,
कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,
हर सुख के बाद आता है दुख
और हर दुख के बाद आता है सुख
जैसे हर दिन के बाद आती है रात
और हर रात के बाद आता है दिन
किसी की रात लम्बी तो किसी का दिन लम्बा
किसी का दुख ज्यादा तो किसीका सुख ज्यादा
गर न हो रात, तो दिन का अहसास नही होगा
गर न हो दुख, तो सुख का अहसास नही होगा
यही है नियम प्रकृति का, और जीना है सबको इसके साथ
कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,
आती है जीवन मे नित नयी समस्या, लगते है नित नये आरोप, प्रत्यारोप
लेकिन आती है जीवन मे फिर नयी सुबह
आता है नया सवेरा लेकर उम्मीद की नयी किरण
कर भरोसा अपने ईश्वर पर, चल अपने कर्मपथ पर
निभा अपने सारे फर्ज ईमानदारी से
रख कर हिम्मत और विश्वास
मिलेगी मजिलं जरूर, चाहे आये अडचने हजार
कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है
जीवन की धूप और छाव,
Indu gupta

Really nice ma'am.. seriously u r very talented 👏👏
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