कौन गलत ,कौन सही


 कौन गलत, कौन सही 

तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही,

हर पल हर क्षण सोचता है हर इंसान यही,

टूट जाये कितने ही दिल, बिखर जाये कितने ही रिश्ते,

नहीं है परवाह किसी बड़े की, नहीं है लिहाज किसी छोटे का

क्योंकि उसे तो हर पल हर क्षण लगता है यही

तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही!

जिए जा रहा है अपने अहंकार में,

अपने आप को ऊँचा रखने की चाह में,

ताउम्र अपने को सही साबित करने की कोशिश में

भूल जाता है कौन गलत,कौन सही

रहता है हर समय हैरान, परेशान,

डूबा रहता है चिंताओं के भंवर में,

हो जाता है तरह तरह की बीमारियों का शिकार,

भागता रहता है हर समय भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे,

छोड़ कर कहीं अपने बेशकीमती रिश्तो को कहीं पीछे,

क्योंकि उसे तो हर पल लगता है यही,

तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही!

क्यों नहीं झाँकता वह अपने अंदर,

क्यों नहीं ढूंढ़ता अपनी गलतियों को,

क्यों नहीं माफ़ी मांगता अपनी भूलों की,

क्यों पड़ा है इस फेर मे,की कौन गलत कौन सही,

क्यों नहीं कहता मैं गलत तुम सही, मैं गलत तुम सही!

अगर आज सब छोड़ दे इस फेर को, की कौन गलत कौन सही,

तो हो जाये इस दुनिआ से दूर सारी परेशानिया,

हो जाये सब जगह शांति और प्यार,

घुल जाये सब रिश्तों मे मिठास,

क्योंकि इंसान तो है गलतियों का पुतला,

सब जान ले गर बात यही, और छोड़ दे इस फेर  को की,

कौन गलत कौन सही, कौन गलत कौन सही!

Comments

  1. Another great theme and creative writing..rather an actuality of life..it is undoubtedly undeniable..👌👌

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  2. Congratulations ma'am..for always coming out wd so authentic writings ..an unbiased writer..✌✌

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  3. Inspired thought provoking 🙏🏻

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  4. अहम की लड़ाई, स्वयं को सदैव सही सिद्ध करने का प्रयास,चाहे अपनी अंतरात्मा न माने यही समाप्त हो जाए तो समाज में शांति सद्भावना स्थापित हो जाए

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  5. Very true...it's really important to take a dive within!!

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