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धूप और छाव,

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 धूप और छाव,  कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,  हर सुख के बाद आता है दुख और हर दुख के बाद आता है सुख जैसे हर दिन के बाद आती है रात और हर रात के बाद आता है दिन किसी की रात लम्बी तो किसी का दिन लम्बा किसी का दुख ज्यादा तो किसीका सुख ज्यादा गर न हो रात, तो दिन का अहसास नही होगा गर न हो दुख, तो सुख का अहसास नही होगा यही है नियम प्रकृति का, और जीना है सबको इसके साथ कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,  आती है जीवन मे नित नयी समस्या, लगते है नित नये आरोप, प्रत्यारोप लेकिन आती है जीवन मे फिर नयी सुबह आता है नया सवेरा लेकर उम्मीद की नयी किरण कर भरोसा अपने ईश्वर पर, चल अपने कर्मपथ पर निभा अपने सारे फर्ज ईमानदारी से रख कर हिम्मत और विश्वास  मिलेगी  मजिलं जरूर, चाहे आये अडचने हजार कयोकि कहते है सुख ॵर दुख तो है जीवन की धूप और छाव,                     Indu gupta

चिन्ता और चिता तक का सफ़र

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 चिन्ता और चिता तक का सफ़र चिंता और चिता मे है अन्तर सिर्फ़ एक बिन्दी का,  चिन्ता है शुरुआत और चिता है अन्त , पहुँचा देती है ये चिन्ता ही चिता तक! हम सोचते रहते है कि हाय क्या होगा,कैसे होगा डूबे रहते है इस चिन्ता मे ही हर पल, परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,कयोंकि नहीं है फ़ुरसत करने  से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! चिन्ता लाती है तरह तरह की बीमारियाँ  होती है सुगर,बढ़ता है ब्लड प्रेशर ,होता है डिप्रेशन  खाता है धक्के डाक्टरों के ,लगाता है लाइनें अस्पतालों मे बढ़ते है ख़र्चे बीमारी मे और दवाइयों मे परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,क्योंकि नहीं है फ़ुरसत करने  से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! छोड़ दे इस चिन्ता को ,छोड़ दे सब अपने ईश्वर पर, करम कर ,चल सच्चाई के रास्ते पर मेहनत कर ,हो जाएँगे सब काम तेरे जैसा करेगा करम ,मिल जाएगा वैसा फल, विश्वास कर और समझ इस चिन्ता और चिता के अन्तर को!

माँ(mother,mom)

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 माँ(mother,mom) माँ, मदर, मॉम ये नहीं है कोई शब्द, ये तो है सिर्फ एक एहसास प्यार का,ममता का भेजा है ईश्वर ने जिसे अपने रूप मे धरती पर, माँ जो सिर्फ जानती है देना, नहीं है उसकी डिक्शनरी मे कोई शब्द लेना   पालती है बच्चों को अपने खून पसीने से, सींचती है छोटी छोटी मासूम कलियों को अपने पसीने से, करती है परवाह अपने बच्चों की आख़री सांस तक, चाहे दुनिया छोड़े उसका साथ,या शरीर खुद का छोड़े उसका साथ नहीं छोड़ती  वो साथ कभी अपने बच्चों का, खड़ी रहती है वो बनकर ढाल उन बच्चों की, चाहे वो बच्चे भी छोड़ दे उसका साथ, परन्तु वो नहीं छोड़ती साथ कभी अपने बच्चों का, क्योंकि वो है माँ, भेजा है ईश्वर ने जिसे अपने रूप मैं धरती पर! माँ है एक रूप निश्छल, निस्वार्थ प्यार का, ममता का  माँ दुआ भी है, माँ दवा भी है, गिरता है बच्चा, पुकारता है माँ, रोता है बच्चा, तो रोती है माँ , हँसता है बच्चा, तो हंसती है माँ ढूढती है उन बच्चों मैं अपनी हंसी माँ, मदर, मॉम ये  नहीं है कोई शब्द, ये तो है सिर्फ एक एहसास प्यार का,ममता का!               Indu gupta

साथ साथ(eternal bondings)

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साथ साथ छूट रहा है धीरे धीरे सब अपनों का साथ कुछ छूट गए, कुछ रूठ गए, और कुछ चले गए उस पार उस पर कुछ ऐसी चली हवा विनाश की, आई महामारी, हुआ महायुद्ध ऐसा उज़ड गए आशियाने, मच गयी त्राहि हो रहा विनाश सृष्टि का, छाया है मातम जैसा लेकिन कहते हैं यही हैं नियम प्रकृति का आती हैं पतझड़, गिरते हैं पत्ते शाखाओ से आती हैं बसंत बहार, फुटती हैं नयी कोपले खिलते हैं फूल, होती हैं ज़िन्दगी गुलो गुलज़ार बनते हैं नये रिश्ते, आती है ज़िन्दगी मे फिर से नयी बहार लोग आते हैं, लोग चले जाते है नहीं रुकता कोई किसी के लिए, नहीं रुकता ये समय, नहीं रुकते ये सूरज, चाँद सितारे चलता रहता है ये आवागमन का चक्र सालो साल ज़ीना है हम सभी को इसी नियम के साथ प्यार, विश्वास, हिम्मत और  के साथ!

यादे(memories)

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                      यादे बहुत याद आती हैं वो बचपन की हसीन यादे, दादी नानी के किस्से कहानियों की यादे, भाई बहनो के छोटे छोटे झगड़ो की यादे, फिर रूठने और पापा के मनाने की यादे, साथ साथ सोने जागने, पढ़ने, हसने, खेलने की यादे, रोज रात को दादा जी को पहाड़े सुनाने की वो यादे, सबका मिलकर T. V देखना और फिर सीट के लिए झगड़ने की यादे, सबका मिलकर गुड्डे गुड़िया का ब्याह रचाने की यादे, बहुत याद आती हैँ वो बचपन की हसीन यादे! कहीं खो गए हैं ये प्यारे रिश्ते इस ज़िन्दगी की आपा धापी मे, बिखर गए है संयुक्त परिवार, नहीं है समय किसी के पास, नहीं बचे हैं सच्चे रिश्ते देने को उसका साथ, अपने अपने T.V और अपने अपने मोबाइल है सबके पास,  सोशल मीडिया है देने को उनका साथ, करते हैं पोस्ट हँसते हुए फोटो, और देखते हैं लाइक्स, पर अंदर से हैं सब अकेले, हैरान, परेशान, बस मन के किसी कोने मे बची हैं बचपन की यादे बहुत याद आती हैं वो बचपन की हसीन यादे!

सफर(journey of life)

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  सफर ज़िन्दगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं! शुरू हुआ ज़िन्दगी का सफर, आया बचपन बिना किसी चिंता के, बेपरवाह, खेलते कूदते माँ बाप की छत्रछाया मे, भाई बहनो के प्यार मे, कब बीत गया बचपन, कब बीत गया बचपन! आई जवानी, लेकर आई नई उमंगे, नया ज़ोश,नये हौसले, कुछ कर गुजरने की चाहतो के साथ, मिला नया घर, नये लोग, और मिली बहुत सी ज़िम्मेदारियां, फिर से आई नयी रौशनी जीवन मे,  लौटा फिर से बचपन , छोटे बच्चों की किलकारियों मे, लेकिन अब पलट चुका था पासा, अब थे तुम माँ बाप और तुम पर थी ज़िम्मेदारयां, एक एक तिनका ज़ोड बनाया घोंसला, आई कितनी ही आंधीया, आये कितने ही तूफ़ान पर आंच न आने दी अपने आशियाने पर, इसी भाग दौड़ मे, कब बीत गयी जवानी, कब बीत गयी जवानी!  और अब आया बुढ़ापा, बडे हुए बच्चे, बदला वक्त, बदलते हुए वक्त के साथ देखा बदलते हुए रिश्तों को, देखा बदलते हुए लोगो के नज़रिये को, देखा अपनों को होता हुए पराये, देखा अपने शरीर को भी होता हुए पराये, लगने लगी तरह तरह की बीमारियां, और बढ़ने लगा डॉक्टरो का साथ, फिर से ज़ुटाया ज़ोश, उठाया पेन और शुरू किया पढ़ना और पढ़ाना, शुरू किया पूरा कर...

कौन गलत ,कौन सही

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  कौन गलत, कौन सही   तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही, हर पल हर क्षण सोचता है हर इंसान यही, टूट जाये कितने ही दिल, बिखर जाये कितने ही रिश्ते, नहीं है परवाह किसी बड़े की, नहीं है लिहाज किसी छोटे का क्योंकि उसे तो हर पल हर क्षण लगता है यही तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! जिए जा रहा है अपने अहंकार में, अपने आप को ऊँचा रखने की चाह में, ताउम्र अपने को सही साबित करने की कोशिश में भूल जाता है कौन गलत,कौन सही रहता है हर समय हैरान, परेशान, डूबा रहता है चिंताओं के भंवर में, हो जाता है तरह तरह की बीमारियों का शिकार, भागता रहता है हर समय भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे, छोड़ कर कहीं अपने बेशकीमती रिश्तो को कहीं पीछे, क्योंकि उसे तो हर पल लगता है यही, तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! क्यों नहीं झाँकता वह अपने अंदर, क्यों नहीं ढूंढ़ता अपनी गलतियों को, क्यों नहीं माफ़ी मांगता अपनी भूलों की, क्यों पड़ा है इस फेर मे,की कौन गलत कौन सही, क्यों नहीं कहता मैं गलत तुम सही, मैं गलत तुम सही! अगर आज सब छोड़ दे इस फेर को, की कौन गलत कौन सही, तो हो जाये इस दुनिआ से दूर सारी परेशानिया, हो जाये सब जगह शांति और प्...