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सफर(journey of life)

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  सफर ज़िन्दगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं! शुरू हुआ ज़िन्दगी का सफर, आया बचपन बिना किसी चिंता के, बेपरवाह, खेलते कूदते माँ बाप की छत्रछाया मे, भाई बहनो के प्यार मे, कब बीत गया बचपन, कब बीत गया बचपन! आई जवानी, लेकर आई नई उमंगे, नया ज़ोश,नये हौसले, कुछ कर गुजरने की चाहतो के साथ, मिला नया घर, नये लोग, और मिली बहुत सी ज़िम्मेदारियां, फिर से आई नयी रौशनी जीवन मे,  लौटा फिर से बचपन , छोटे बच्चों की किलकारियों मे, लेकिन अब पलट चुका था पासा, अब थे तुम माँ बाप और तुम पर थी ज़िम्मेदारयां, एक एक तिनका ज़ोड बनाया घोंसला, आई कितनी ही आंधीया, आये कितने ही तूफ़ान पर आंच न आने दी अपने आशियाने पर, इसी भाग दौड़ मे, कब बीत गयी जवानी, कब बीत गयी जवानी!  और अब आया बुढ़ापा, बडे हुए बच्चे, बदला वक्त, बदलते हुए वक्त के साथ देखा बदलते हुए रिश्तों को, देखा बदलते हुए लोगो के नज़रिये को, देखा अपनों को होता हुए पराये, देखा अपने शरीर को भी होता हुए पराये, लगने लगी तरह तरह की बीमारियां, और बढ़ने लगा डॉक्टरो का साथ, फिर से ज़ुटाया ज़ोश, उठाया पेन और शुरू किया पढ़ना और पढ़ाना, शुरू किया पूरा कर...

कौन गलत ,कौन सही

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  कौन गलत, कौन सही   तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही, हर पल हर क्षण सोचता है हर इंसान यही, टूट जाये कितने ही दिल, बिखर जाये कितने ही रिश्ते, नहीं है परवाह किसी बड़े की, नहीं है लिहाज किसी छोटे का क्योंकि उसे तो हर पल हर क्षण लगता है यही तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! जिए जा रहा है अपने अहंकार में, अपने आप को ऊँचा रखने की चाह में, ताउम्र अपने को सही साबित करने की कोशिश में भूल जाता है कौन गलत,कौन सही रहता है हर समय हैरान, परेशान, डूबा रहता है चिंताओं के भंवर में, हो जाता है तरह तरह की बीमारियों का शिकार, भागता रहता है हर समय भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे, छोड़ कर कहीं अपने बेशकीमती रिश्तो को कहीं पीछे, क्योंकि उसे तो हर पल लगता है यही, तुम गलत मैं सही, तुम गलत मैं सही! क्यों नहीं झाँकता वह अपने अंदर, क्यों नहीं ढूंढ़ता अपनी गलतियों को, क्यों नहीं माफ़ी मांगता अपनी भूलों की, क्यों पड़ा है इस फेर मे,की कौन गलत कौन सही, क्यों नहीं कहता मैं गलत तुम सही, मैं गलत तुम सही! अगर आज सब छोड़ दे इस फेर को, की कौन गलत कौन सही, तो हो जाये इस दुनिआ से दूर सारी परेशानिया, हो जाये सब जगह शांति और प्...

विनाशकारी कोरोना

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विनाशकारी कोरोना            कब अंत होगा, कब अंत होगा,कब अंत होगा इस कोरोना का, हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! मचा है आंतक चारों ओर,उठ रही हैँ सिसकियो की आवाज़े चारों ओर, आ रहा है रात दिन एम्बुलेंस का शोर, लील ली हैँ कितनी ही ज़िन्दगिया, कर रहे हैँ लोग त्राहि त्राहि हर ओर! हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! ख़तम हो रही है ऑक्सीजन, नहीं बची है सांस, नहीं है जगह किसी अस्पताल में, नहीं बचने की कोई आस, लगी है लम्बी लम्बी कतारे शमशान घाटों में, नदियों में बह रही लोगो की लाश, मची है लूट खसोट हर ओर, बेच दी है आत्मा और दीन ईमान, नोच रहा है इंसान इंसान को गिधो  की तरह, छाया है मातम हर घर में, पसरा है स्नाटा सड़को पे, हर एक के मन में है यही सवाल,कब अंत होगा इस  कोरोना का! लेकिन देना तो पड़ेगा जवाब उस ईश्वर के दरबार में, क्यों नहीं लेता ज़िम्मेदारी कोई भी नेता इतनी मौतों का, बस चल रहा है दौर आरोप प्रत्यारोपों का, कोई तो पूछे उन लोगो से ज़िन लोगो ने खोया अपनों को,हो गए कितने ही बच्चे अनाथ, हर एक के मन में है यही स...

Breathe

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              सांस टूटती हुई साँसे,डूबती हुई आस पता नहीं कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी आज! ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस.! टुकुर टुकुर  अश्रु भारी आँखों से निहारते है हर किसी को, शायद मिल जाये कहीं से कोई आस.! भाग रहा था हर इंसान अपने अहम् में, बना खुदगर्ज, पैसे की चका चौँघ में, कर रहा था अपने लिए इकठा हर ऐशोआराम का सामान.! लेकिन आज एक छोटे से वायरस ने दिखा दी उसे उसकी औकात, रह जायेगा सब यहीं जब निकल जाएगी उसकी सांस.! करते हैँ हम प्राथना उस ऊपर वाले से, जिसने दर्द दिया,वही निवारण देगा, वही डूबती हुई नैया को सहारा देगा.! नहीं है किसी इंसान के बस की बात, क्योंकि ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस..

What is life

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             What is life जिंदगी क्या है, क्यों है और किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन में! कभी लगती ये ज़िन्दगी आकाश सी, तो कभी लगती धरती सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी कल कल बहती नदी सी, तो कभी लगती रेतीले मैदानों सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी पहाड़ो सी, तो कभी लगती गहरी खाई सी! कभी लगती कटीली झाड़ियों सी, तो कभी लगती फूलों के बाग़ सी! ज़िन्दगीक्या है, क्योंकि है, किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन मे! कभी लगती ये ज़िन्दगी बहार सी, तो कभी लगती पतझड़ के सूखे पत्तों सी! ज़िन्दगी दिखाती है इतने रंग, इतने मौसम की, कभी लगती ये ज़िन्दगी एक आशा की किरण सी,तो कभी लगती उलझनों से भारी मुश्किल डगर सी! क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ ज़िम्मेदारियां पूरी करने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ घर गृहस्थी समालने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ सुलझे अनसुलझे रिश्ते सभालने का, क्या हम खो गए है कहीं इस मुश्किल भरे सफर में, नहीं पता किसी को कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी हमें एक दिन, बस हमें तो प्यार से, विश्वास से, सब्र से, चलते जाना है, चलते जाना है, चलते जाना है!

Numbers (नंबरो की भाषा)

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                             नंबरो की भाषा कहते है प्रकृति का कन कन कुछ बोलता है, हर एक की है अपनी अलग अलग बोलो, अपनी अलग अलग भाषा! इंसान की है अपनी बोली, पशु पश्चिकयो की है अपनी बोली, पेड़ पौधों की भी होती है अपनी बोली, हर एक की है अपनी अलग अलग बोली, अपनी अलग अलग भाषा! 26 के 26 वर्ण माला के अक्षरों की भी है अपनी अलग बोली, 1 से 9 नंबरो की भी है अपनी अलग अलग बोली, नंबर 1 कहता है मैं हूँ राजा,  करता हूँ सबके दिल पर राज, है नंबर 2 मेरी रानी, चमकते है हम सूरज चाँद की तरह और भर देते है उजियारा! नंबर 3 और नंबर 6 है दो गुरु जिनमे रहता है हमेशा छत्तीस का आंकड़ा, क्योंकि एक है देव गुरु और एक है देत्या गुरु! समझते है दोनों एक दूसरे से ऊपर अपने को, परन्तु देते है दुनिया को शिक्षा, दीक्षा,और ग्लैमर! नंबर 4 और नंबर 7 है राहु और केतु, जो है एक शरीर के दो हिस्से,एक है सर और एक है धड! एक बनाता है रोबिनहुड और एक बनाता है अध्यात्मिक ! नंबर 5 और नंबर 8,है राजा के दो पुत्र, एक है राजकुमार और एक है जज, राजकुमार करता है सब बैलेंस औ...

Happiness

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           ख़ुशी मै परेशान, मै परेशान, मै बहुत परेशान हर कोई कहता है मै बहुत  परेशान  शायद ढूंढ रहा है हर कोई ख़ुशी, कहीं तो मिलेगी ये ख़ुशी, शायद गुम है किसी कोने मे ये ख़ुशी, ख़ुशी क्या कोई चीज है जो मिल जाएगी किसी कोने मे, इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! भूखे को मिलती हे खुशी दो रोटी मे, नंगे को मिलती हे ख़ुशी दो कपड़ो  मे प्यासे को मिलती है ख़ुशी दो घूँट पानी मे ठण्ड से सिकुड़ते हुए इंसान को मिलती हे ख़ुशी आशियाना मिल जाने मे स्टूडेंट को मिलती है ख़ुशी अच्छे मार्क्स आने मे बूढ़े माँ बाप को मिलती है ख़ुशी बच्चों के  प्यार के दो बोल मे नेताओं को मिलती है ख़ुशी कुर्सी मिल जाने मे काम से घर थके हुए आने पर मिलती है ख़ुशी पत्नी और बच्चों की प्यारी मुस्कान मे क्योंकि इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! नहीं है अंत इस ख़ुशी का जो मिलती है भौतिक सुख सुविधाओं  मे ढूढना है  गर इस ख़ुशी को, तो ढूंढो अपने अंदर कहीं नहीं है छुपी,ये ख़ुशी किसी कोने मे ख़ुशी है छुपी यहीं अपने अंदर क्योंकि ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! ख़ुशी मिलती है चिंता छोड़ देने मे ख़ुश...