चिन्ता और चिता तक का सफ़र
चिन्ता और चिता तक का सफ़र चिंता और चिता मे है अन्तर सिर्फ़ एक बिन्दी का, चिन्ता है शुरुआत और चिता है अन्त , पहुँचा देती है ये चिन्ता ही चिता तक! हम सोचते रहते है कि हाय क्या होगा,कैसे होगा डूबे रहते है इस चिन्ता मे ही हर पल, परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,कयोंकि नहीं है फ़ुरसत करने से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! चिन्ता लाती है तरह तरह की बीमारियाँ होती है सुगर,बढ़ता है ब्लड प्रेशर ,होता है डिप्रेशन खाता है धक्के डाक्टरों के ,लगाता है लाइनें अस्पतालों मे बढ़ते है ख़र्चे बीमारी मे और दवाइयों मे परन्तु कब धोखा दे जाएगा ये समय और कब पहुँचा देगा चिता मे, नहीं है पता उसे ,क्योंकि नहीं है फ़ुरसत करने से उसे चिन्ता हर पल ,हर समय! छोड़ दे इस चिन्ता को ,छोड़ दे सब अपने ईश्वर पर, करम कर ,चल सच्चाई के रास्ते पर मेहनत कर ,हो जाएँगे सब काम तेरे जैसा करेगा करम ,मिल जाएगा वैसा फल, विश्वास कर और समझ इस चिन्ता और चिता के अन्तर को!