Breathe
सांस टूटती हुई साँसे,डूबती हुई आस पता नहीं कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी आज! ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस.! टुकुर टुकुर अश्रु भारी आँखों से निहारते है हर किसी को, शायद मिल जाये कहीं से कोई आस.! भाग रहा था हर इंसान अपने अहम् में, बना खुदगर्ज, पैसे की चका चौँघ में, कर रहा था अपने लिए इकठा हर ऐशोआराम का सामान.! लेकिन आज एक छोटे से वायरस ने दिखा दी उसे उसकी औकात, रह जायेगा सब यहीं जब निकल जाएगी उसकी सांस.! करते हैँ हम प्राथना उस ऊपर वाले से, जिसने दर्द दिया,वही निवारण देगा, वही डूबती हुई नैया को सहारा देगा.! नहीं है किसी इंसान के बस की बात, क्योंकि ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस..