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What is life

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             What is life जिंदगी क्या है, क्यों है और किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन में! कभी लगती ये ज़िन्दगी आकाश सी, तो कभी लगती धरती सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी कल कल बहती नदी सी, तो कभी लगती रेतीले मैदानों सी! कभी लगती ये ज़िन्दगी पहाड़ो सी, तो कभी लगती गहरी खाई सी! कभी लगती कटीली झाड़ियों सी, तो कभी लगती फूलों के बाग़ सी! ज़िन्दगीक्या है, क्योंकि है, किसलिए है, घूमता है ये सवाल हरसमय अंतरमन मे! कभी लगती ये ज़िन्दगी बहार सी, तो कभी लगती पतझड़ के सूखे पत्तों सी! ज़िन्दगी दिखाती है इतने रंग, इतने मौसम की, कभी लगती ये ज़िन्दगी एक आशा की किरण सी,तो कभी लगती उलझनों से भारी मुश्किल डगर सी! क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ ज़िम्मेदारियां पूरी करने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ घर गृहस्थी समालने का, क्या ये ज़िन्दगी नाम है सिर्फ सुलझे अनसुलझे रिश्ते सभालने का, क्या हम खो गए है कहीं इस मुश्किल भरे सफर में, नहीं पता किसी को कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी हमें एक दिन, बस हमें तो प्यार से, विश्वास से, सब्र से, चलते जाना है, चलते जाना है, चलते जाना है!

Numbers (नंबरो की भाषा)

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                             नंबरो की भाषा कहते है प्रकृति का कन कन कुछ बोलता है, हर एक की है अपनी अलग अलग बोलो, अपनी अलग अलग भाषा! इंसान की है अपनी बोली, पशु पश्चिकयो की है अपनी बोली, पेड़ पौधों की भी होती है अपनी बोली, हर एक की है अपनी अलग अलग बोली, अपनी अलग अलग भाषा! 26 के 26 वर्ण माला के अक्षरों की भी है अपनी अलग बोली, 1 से 9 नंबरो की भी है अपनी अलग अलग बोली, नंबर 1 कहता है मैं हूँ राजा,  करता हूँ सबके दिल पर राज, है नंबर 2 मेरी रानी, चमकते है हम सूरज चाँद की तरह और भर देते है उजियारा! नंबर 3 और नंबर 6 है दो गुरु जिनमे रहता है हमेशा छत्तीस का आंकड़ा, क्योंकि एक है देव गुरु और एक है देत्या गुरु! समझते है दोनों एक दूसरे से ऊपर अपने को, परन्तु देते है दुनिया को शिक्षा, दीक्षा,और ग्लैमर! नंबर 4 और नंबर 7 है राहु और केतु, जो है एक शरीर के दो हिस्से,एक है सर और एक है धड! एक बनाता है रोबिनहुड और एक बनाता है अध्यात्मिक ! नंबर 5 और नंबर 8,है राजा के दो पुत्र, एक है राजकुमार और एक है जज, राजकुमार करता है सब बैलेंस औ...

Happiness

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           ख़ुशी मै परेशान, मै परेशान, मै बहुत परेशान हर कोई कहता है मै बहुत  परेशान  शायद ढूंढ रहा है हर कोई ख़ुशी, कहीं तो मिलेगी ये ख़ुशी, शायद गुम है किसी कोने मे ये ख़ुशी, ख़ुशी क्या कोई चीज है जो मिल जाएगी किसी कोने मे, इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! भूखे को मिलती हे खुशी दो रोटी मे, नंगे को मिलती हे ख़ुशी दो कपड़ो  मे प्यासे को मिलती है ख़ुशी दो घूँट पानी मे ठण्ड से सिकुड़ते हुए इंसान को मिलती हे ख़ुशी आशियाना मिल जाने मे स्टूडेंट को मिलती है ख़ुशी अच्छे मार्क्स आने मे बूढ़े माँ बाप को मिलती है ख़ुशी बच्चों के  प्यार के दो बोल मे नेताओं को मिलती है ख़ुशी कुर्सी मिल जाने मे काम से घर थके हुए आने पर मिलती है ख़ुशी पत्नी और बच्चों की प्यारी मुस्कान मे क्योंकि इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! नहीं है अंत इस ख़ुशी का जो मिलती है भौतिक सुख सुविधाओं  मे ढूढना है  गर इस ख़ुशी को, तो ढूंढो अपने अंदर कहीं नहीं है छुपी,ये ख़ुशी किसी कोने मे ख़ुशी है छुपी यहीं अपने अंदर क्योंकि ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग! ख़ुशी मिलती है चिंता छोड़ देने मे ख़ुश...

मै हार नहीं मानूगी

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 मै हार नहीं मानूगी मै हार नहीं मानूगी ,मै हार नहीं मानूगी मै इस ज़िन्दगी से हार नहीं मानूगी! ले कितनी ही परीक्षाएं  ये ज़िन्दगी पर मै हार नहीं मानूगी! न टूटऊंगी, न झूंकगी,मैं भी ज़िद पर अड़ी रहूँगी पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! आँए कितने ही उतार चढ़ाव या कितने ही  आंधी तूफ़ान, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! लोग दे कितनी ही बुराईया, पर मै ना डरूंगी ना रुकूगी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! ज़लती रहूँगी एक छोटे से दिए की  तरह इस तूफ़ान मे भी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! भरोसा है मुझे  अपने उस भगवान पर और अपने आप पर, वो डूबने नहीं देगा मेरी छोटी सी नाव को, नहीं छोड़ेगा मुझे इस मंझदार मे! क्योंकि ये ज़िद है मेरी,मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी!

समय का चक्र

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 समय का चक्र  दिन निकलता है रात होती है ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है पल पल कर उम्र यूँ ही घटती जाती है  कभी ख़ुशी के दो पल, कभी ग़म के दो पल धूप आैर छॉव की तरह  ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है कभी बच्चों की समस्या  कभी पैसों की समस्या  कभी रिश्तों की उलझने कभी ज़मीन जायदाद के झगड़े इन्हीं तरह तरह की उधेड़बुनों मे  ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है। जाना है सबको एक दिन इस दुनिया से उलझे उलझे से ,इन उधेड़बुनों मे उलझे हुए ही चले जाएँगे इस दुनिया से  तब याद करेगी दुनिया, और कहेगी आ गया था वक़्त इनका  नहीं रुकता समय किसी के वास्ते क्योंकि ज़िंदगी सभी की यूँ ही तमाम होती है। ज़रूरत है इस जाते हुए हर पल को ख़ुशी से जीने की छोटी छोटी बातों मैं ख़ुशियाँ ढूँढने की और लोगों मे बाटने की ज़िंदादिली से जीने की क्योंकि ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है।

Adhocism

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                                   बेचारा Adhoc बेचारा Adhoc, बेचारा Adhocकहते है उसको सब बेचारा Adhoc! Adhoc means तदर्थ जिसका होता नहीं कोई अर्थ  हर चार महीने बाद अटक जाती है उसकी साँस हर समय रहती है उसको joining की अास, मिले कोई भी पेपर या कितने ही lecture पढ़ता नहीं उसे कोई फ़र्क़  क्योंकि कहते है उसको सब बेचारा Adhoc,बेचारा Adhoc! ताउम् भागता रहता है सब के पीछे होता है गुटबाज़ी का शिकार, अाती है गरमी की छुट्टी ,लोग सोते हैं सुकून की नींद पंरतु उसकी तो उड़ जाती है रात और दिन की नींद कब मिलेगी मेरी summer salary ,कब मिलेगी मेरी summer salary! Students भी करते है उससे भेदभाव क्योंकि वो है बेचारा Adhoc, बेचारा Adhoc! जीता है डर के साये मैं , हमेशा इस आशा मे , कभी तो आएगा उसका भी समय और वो भी निकलेगा इस मकड़जाल से बाहर क्योंकि कहते है उसको सब बेचारा Adhoc ,बेचारा Adhoc!

दस्तूर

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                                                           दस्तूर यही है दस्तूर ज़माने का ,यही है दस्तूर ज़माने का हर बात पर सब कहते है यही है दस्तूर ज़माने का! Mask पहनो,sanitize करो,और करो Social distancing maintain, यही है दस्तूर कोरोना का! मॉ बाप को छोड़ अकेला बस जाएँ बाहर विदेशों में  यही है दस्तूर ज़माने का! बात बात पर सड़कों पर झगड़ा करे और करे मारपिटाई ,यही है दस्तूर ज़माने का! न आपस में बात करे ,न बोले सुख दुख के दो बोल बस करे whatsapp पर चैट ,यही है दस्तूर ज़माने का! सब के अपने कमरे ,अपने टीवी और हैअपने mobile फ़ोन ,यही है दस्तूर ज़माने का संयुक्त परिवार में होकर भी रहते है सब अपनेपन से दूर बंद है सब अपने अपने  कमरों में ,यही है दस्तूर ज़माने का! न कोई साथी न कोई संगी, सब की अपनी चिंता अपने पास यही है दस्तूर ज़माने का! जब देता नहीं कोई साथ ,तो बनते है डिप्रेशन जैसी बीमारी के शिकार फिर कहते है यही है दस्तूर ज़माने का ,यह...