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मै हार नहीं मानूगी

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 मै हार नहीं मानूगी मै हार नहीं मानूगी ,मै हार नहीं मानूगी मै इस ज़िन्दगी से हार नहीं मानूगी! ले कितनी ही परीक्षाएं  ये ज़िन्दगी पर मै हार नहीं मानूगी! न टूटऊंगी, न झूंकगी,मैं भी ज़िद पर अड़ी रहूँगी पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! आँए कितने ही उतार चढ़ाव या कितने ही  आंधी तूफ़ान, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! लोग दे कितनी ही बुराईया, पर मै ना डरूंगी ना रुकूगी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! ज़लती रहूँगी एक छोटे से दिए की  तरह इस तूफ़ान मे भी, पर मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी! भरोसा है मुझे  अपने उस भगवान पर और अपने आप पर, वो डूबने नहीं देगा मेरी छोटी सी नाव को, नहीं छोड़ेगा मुझे इस मंझदार मे! क्योंकि ये ज़िद है मेरी,मै हार नहीं मानूगी,मै हार नहीं मानूगी!

समय का चक्र

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 समय का चक्र  दिन निकलता है रात होती है ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है पल पल कर उम्र यूँ ही घटती जाती है  कभी ख़ुशी के दो पल, कभी ग़म के दो पल धूप आैर छॉव की तरह  ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है कभी बच्चों की समस्या  कभी पैसों की समस्या  कभी रिश्तों की उलझने कभी ज़मीन जायदाद के झगड़े इन्हीं तरह तरह की उधेड़बुनों मे  ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है। जाना है सबको एक दिन इस दुनिया से उलझे उलझे से ,इन उधेड़बुनों मे उलझे हुए ही चले जाएँगे इस दुनिया से  तब याद करेगी दुनिया, और कहेगी आ गया था वक़्त इनका  नहीं रुकता समय किसी के वास्ते क्योंकि ज़िंदगी सभी की यूँ ही तमाम होती है। ज़रूरत है इस जाते हुए हर पल को ख़ुशी से जीने की छोटी छोटी बातों मैं ख़ुशियाँ ढूँढने की और लोगों मे बाटने की ज़िंदादिली से जीने की क्योंकि ज़िंदगी यूँ ही तमाम होती है।

Adhocism

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                                   बेचारा Adhoc बेचारा Adhoc, बेचारा Adhocकहते है उसको सब बेचारा Adhoc! Adhoc means तदर्थ जिसका होता नहीं कोई अर्थ  हर चार महीने बाद अटक जाती है उसकी साँस हर समय रहती है उसको joining की अास, मिले कोई भी पेपर या कितने ही lecture पढ़ता नहीं उसे कोई फ़र्क़  क्योंकि कहते है उसको सब बेचारा Adhoc,बेचारा Adhoc! ताउम् भागता रहता है सब के पीछे होता है गुटबाज़ी का शिकार, अाती है गरमी की छुट्टी ,लोग सोते हैं सुकून की नींद पंरतु उसकी तो उड़ जाती है रात और दिन की नींद कब मिलेगी मेरी summer salary ,कब मिलेगी मेरी summer salary! Students भी करते है उससे भेदभाव क्योंकि वो है बेचारा Adhoc, बेचारा Adhoc! जीता है डर के साये मैं , हमेशा इस आशा मे , कभी तो आएगा उसका भी समय और वो भी निकलेगा इस मकड़जाल से बाहर क्योंकि कहते है उसको सब बेचारा Adhoc ,बेचारा Adhoc!

दस्तूर

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                                                           दस्तूर यही है दस्तूर ज़माने का ,यही है दस्तूर ज़माने का हर बात पर सब कहते है यही है दस्तूर ज़माने का! Mask पहनो,sanitize करो,और करो Social distancing maintain, यही है दस्तूर कोरोना का! मॉ बाप को छोड़ अकेला बस जाएँ बाहर विदेशों में  यही है दस्तूर ज़माने का! बात बात पर सड़कों पर झगड़ा करे और करे मारपिटाई ,यही है दस्तूर ज़माने का! न आपस में बात करे ,न बोले सुख दुख के दो बोल बस करे whatsapp पर चैट ,यही है दस्तूर ज़माने का! सब के अपने कमरे ,अपने टीवी और हैअपने mobile फ़ोन ,यही है दस्तूर ज़माने का संयुक्त परिवार में होकर भी रहते है सब अपनेपन से दूर बंद है सब अपने अपने  कमरों में ,यही है दस्तूर ज़माने का! न कोई साथी न कोई संगी, सब की अपनी चिंता अपने पास यही है दस्तूर ज़माने का! जब देता नहीं कोई साथ ,तो बनते है डिप्रेशन जैसी बीमारी के शिकार फिर कहते है यही है दस्तूर ज़माने का ,यह...

बुढ़ापा(old age)

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             बुढ़ापा  कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब, बना देता है इंसान को लाचार कर देता है सबकी नज़रों में बेकार ! कल तक थे जो मालिक इस दरोदीवार के आज हो गए है पराए उसी आशियाने के  तरसते है सुनने को एक आवाज़                                     कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब!                                  बैठे है सिमट के एक कोने मे चुपचाप आएगा,कोई तो आएगा पूछेगा उन्हें भी एक बार, कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब ! जिनके लिए दिन रात पसीना बहाया जिनके लिए निछावर कर दी अपनी जान उन्हें नहीं है परवाह बूढ़े मॉ बाप की समझते है बोझ और देते है तिरस्कार  कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब ! पता है सब को आना है यह समय  सब की ज़िंदगी मे एक बार पंरतु  जिये जा रहे है ये बेपरवाह ख़ुदगर्ज़  देकर उन बूढ़ों की ऑंखो मे आँसू बार बार कहते है बुढ़ापा होता...

रिश्ते(RELATIONS)

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           रिश्ते  किसके किससे कैसे रिश्ते! माँ बाप के रिश्ते,भाई बहन के रिश्ते पति पत्नी के रिश्ते ,दोस्तों के रिश्ते पड़ोसियों के रिश्ते ,समाज के रिश्ते किसके किससे कैसे रिश्ते! क्या सब रिश्ते पैसों के हैं, क्या सब रिश्ते दिखावे के हैं, क्या सब रिश्ते ख़ुदगर्ज़ी के है, क्या सब रिश्ते झूठ और अहंकार के हैं      क्या सब रिश्ते सिफ mobile,T.V,और social media के है कहाँ गये सब भरे पूरे परिवार के हँसते खेलतेरिश्ते  गली मोहल्ले ,चौपालो के रिश्ते किसके किससे कैसे रिश्ते! नहीं कोई जगह इनमें नफ़रत की अहंकार की नहीं कोई जगह इनमें झूठ और पैसों की ज़रूरत है सिफ अपनेपन ,प्यार और विश्वास की सीखो करना माफ़ अपने और दूसरों के गुनाहों को, करो पहल ,तोडो इन झूठी दीवारों को अागे बढ़कर जोड़ो इन रिश्तों को किसके किससे कैसे रिश्ते!

ज़िंदगी(a big opportunity)

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ज़िंदगी (एक मौक़ा) ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न मानना कभी हार,  हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न डरना किसी परछाईं से ,न डरना किसी खाई से न डरना कभी ऊँचाई से ,न डरना कभी गहराई से बना लो इसे अपना हथियार चलो सीना तान,बन के हिम्मतवार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! करते है suicide जो ,वो होते है कायर, मान लेते है हार! आता है ये समय सब की ज़िंदगी में बार बार डूबती है नैया ,खाती है हिचकोले कई बार पर मानना नहीं हार, हो जाएगी नैया पार सीखो सबक़ उनसे ,जिन्होंने मानी नहीं कभी हार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! आती है परेशानी बहुत बार, डूबता है मन कई बार देते है लोग बुराई बहुत बार, लगती है ज़िंदगी बेकार पर तुम न मानना कभी हार ,हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार कर लो इसका एतबार !