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दस्तूर

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                                                           दस्तूर यही है दस्तूर ज़माने का ,यही है दस्तूर ज़माने का हर बात पर सब कहते है यही है दस्तूर ज़माने का! Mask पहनो,sanitize करो,और करो Social distancing maintain, यही है दस्तूर कोरोना का! मॉ बाप को छोड़ अकेला बस जाएँ बाहर विदेशों में  यही है दस्तूर ज़माने का! बात बात पर सड़कों पर झगड़ा करे और करे मारपिटाई ,यही है दस्तूर ज़माने का! न आपस में बात करे ,न बोले सुख दुख के दो बोल बस करे whatsapp पर चैट ,यही है दस्तूर ज़माने का! सब के अपने कमरे ,अपने टीवी और हैअपने mobile फ़ोन ,यही है दस्तूर ज़माने का संयुक्त परिवार में होकर भी रहते है सब अपनेपन से दूर बंद है सब अपने अपने  कमरों में ,यही है दस्तूर ज़माने का! न कोई साथी न कोई संगी, सब की अपनी चिंता अपने पास यही है दस्तूर ज़माने का! जब देता नहीं कोई साथ ,तो बनते है डिप्रेशन जैसी बीमारी के शिकार फिर कहते है यही है दस्तूर ज़माने का ,यह...

बुढ़ापा(old age)

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             बुढ़ापा  कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब, बना देता है इंसान को लाचार कर देता है सबकी नज़रों में बेकार ! कल तक थे जो मालिक इस दरोदीवार के आज हो गए है पराए उसी आशियाने के  तरसते है सुनने को एक आवाज़                                     कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब!                                  बैठे है सिमट के एक कोने मे चुपचाप आएगा,कोई तो आएगा पूछेगा उन्हें भी एक बार, कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब ! जिनके लिए दिन रात पसीना बहाया जिनके लिए निछावर कर दी अपनी जान उन्हें नहीं है परवाह बूढ़े मॉ बाप की समझते है बोझ और देते है तिरस्कार  कहते है बुढ़ापा होता है बहुत ख़राब ! पता है सब को आना है यह समय  सब की ज़िंदगी मे एक बार पंरतु  जिये जा रहे है ये बेपरवाह ख़ुदगर्ज़  देकर उन बूढ़ों की ऑंखो मे आँसू बार बार कहते है बुढ़ापा होता...

रिश्ते(RELATIONS)

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           रिश्ते  किसके किससे कैसे रिश्ते! माँ बाप के रिश्ते,भाई बहन के रिश्ते पति पत्नी के रिश्ते ,दोस्तों के रिश्ते पड़ोसियों के रिश्ते ,समाज के रिश्ते किसके किससे कैसे रिश्ते! क्या सब रिश्ते पैसों के हैं, क्या सब रिश्ते दिखावे के हैं, क्या सब रिश्ते ख़ुदगर्ज़ी के है, क्या सब रिश्ते झूठ और अहंकार के हैं      क्या सब रिश्ते सिफ mobile,T.V,और social media के है कहाँ गये सब भरे पूरे परिवार के हँसते खेलतेरिश्ते  गली मोहल्ले ,चौपालो के रिश्ते किसके किससे कैसे रिश्ते! नहीं कोई जगह इनमें नफ़रत की अहंकार की नहीं कोई जगह इनमें झूठ और पैसों की ज़रूरत है सिफ अपनेपन ,प्यार और विश्वास की सीखो करना माफ़ अपने और दूसरों के गुनाहों को, करो पहल ,तोडो इन झूठी दीवारों को अागे बढ़कर जोड़ो इन रिश्तों को किसके किससे कैसे रिश्ते!

ज़िंदगी(a big opportunity)

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ज़िंदगी (एक मौक़ा) ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न मानना कभी हार,  हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न डरना किसी परछाईं से ,न डरना किसी खाई से न डरना कभी ऊँचाई से ,न डरना कभी गहराई से बना लो इसे अपना हथियार चलो सीना तान,बन के हिम्मतवार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! करते है suicide जो ,वो होते है कायर, मान लेते है हार! आता है ये समय सब की ज़िंदगी में बार बार डूबती है नैया ,खाती है हिचकोले कई बार पर मानना नहीं हार, हो जाएगी नैया पार सीखो सबक़ उनसे ,जिन्होंने मानी नहीं कभी हार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! आती है परेशानी बहुत बार, डूबता है मन कई बार देते है लोग बुराई बहुत बार, लगती है ज़िंदगी बेकार पर तुम न मानना कभी हार ,हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार कर लो इसका एतबार !

My dear father

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A small tribute to him as today he left us two years back🙏🙏🙏🙏         मेरे प्यारे पापा खुदा की जीवित प्रतिमा को कहते है पिता जिनकी उगली पकड़कर चलना सीखा जिनसे ज्ञान और शिक्षा पाकर जीना सीखा जिनके आशीवाद से सफलता पाई एेसे प्यारे थे मेरे पिता ! मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए  सबकुछ सह जाते थे सब भाईबहनो कोडॉटते और बड़ों से लड़ जाते थे  एेसे प्यारे थे मेरे पिता ! उनके जैसा कोई नहीं इस दुनिया में  भगवान का दूसरा रुप थे मेरे पिता हर दुख ख़ुद सहते थे हर ज़िद हमारी पूरी करते थे एेसे थे मेरे प्यारे पिता !  सारे रिश्ते उनके दम से ,सारी बातें उनसे थीं सारे घर के दिल की धड़कन ,सारे घर की जान थे मेरे प्यारे पिता ! आज मेरी यादों में ,मेरे दिल में  बसे है मेरे प्यारे पिता मेरी हिम्मत ,मेरा ग़रूर  मेरा अभिमान है मेरे प्यारे पिता !

भूख

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        भूख भूख है लगी सभी को. किसी को किसी की ,किसी को किसी की भूखे को रोटी की ,नंगे को कपडे की खुले मैं  रहने वालों को छत की अनपढ़ को शिक्षा की बेरोज़गारों को रोजग़ार की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की साधु को भक्ति और भगवान की नेताओं को कुसी की  अभिनेताओं को नाम की अमीरों को और पैसों की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की देशभक्तों को देश के सम्मान की सीमा पर तैनात सिपाही को दुश्मन पर जीत की शिक्षक को ज्ञान की और  बुढ़ापे में प्यार और साथ की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की,किसी को किसी की सब पूछते है सवाल क्या है अंत इस दौड़ का मैं कहती हू संतोष और विश्वास  ही अंत है इस होड़ का भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की

ग़लती

        ग़लती न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती किसकी ग़लती उसकी ग़लती! जब बच्चे भूख से रोए .तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! जब आवारा हो जाए ,तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! जब नंबर कम आए ,तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती किसकी ग़लती उसकी ग़लती! बेटा ग़लती करे ,तो बहू कहे  किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! बहू ग़लती करे ,तो बेटा कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! पति ग़लती करे ,तो बच्चे कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! बेटी ससुराल मे ग़लती करे ,तो सास कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! भाई भाई लडाई करे ,तो सब कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! न तेरी ग़लती, न मेरी ग़लती किसकी ग़लती ,उस भगवान की ग़लती जिसने मॉ बनाई, न बनाता मॉ ,न होती ग़लती! न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती  किसकी ग़लती ,उसकी ग़लती!