साथ साथ(eternal bondings)

साथ साथ
छूट रहा है धीरे धीरे सब अपनों का साथ
कुछ छूट गए, कुछ रूठ गए, और कुछ चले गए उस पार
उस पर कुछ ऐसी चली हवा विनाश की,
आई महामारी, हुआ महायुद्ध ऐसा
उज़ड गए आशियाने, मच गयी त्राहि
हो रहा विनाश सृष्टि का, छाया है मातम जैसा
लेकिन कहते हैं यही हैं नियम प्रकृति का
आती हैं पतझड़, गिरते हैं पत्ते शाखाओ से
आती हैं बसंत बहार, फुटती हैं नयी कोपले
खिलते हैं फूल, होती हैं ज़िन्दगी गुलो गुलज़ार
बनते हैं नये रिश्ते, आती है ज़िन्दगी मे फिर से नयी बहार
लोग आते हैं, लोग चले जाते है नहीं रुकता कोई किसी के लिए,
नहीं रुकता ये समय, नहीं रुकते ये सूरज, चाँद सितारे
चलता रहता है ये आवागमन का चक्र सालो साल
ज़ीना है हम सभी को इसी नियम के साथ
प्यार, विश्वास, हिम्मत और  के साथ!

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