Breathe
सांस
टूटती हुई साँसे,डूबती हुई आस
पता नहीं कहाँ ले जाएगी ये ज़िन्दगी आज!
ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस.!
टुकुर टुकुर अश्रु भारी आँखों से निहारते है हर किसी को,
शायद मिल जाये कहीं से कोई आस.!
भाग रहा था हर इंसान अपने अहम् में, बना खुदगर्ज, पैसे की चका चौँघ में,
कर रहा था अपने लिए इकठा हर ऐशोआराम का सामान.!
लेकिन आज एक छोटे से वायरस ने दिखा दी उसे उसकी औकात,
रह जायेगा सब यहीं जब निकल जाएगी उसकी सांस.!
करते हैँ हम प्राथना उस ऊपर वाले से,
जिसने दर्द दिया,वही निवारण देगा, वही डूबती हुई नैया को सहारा देगा.!
नहीं है किसी इंसान के बस की बात,
क्योंकि ज़िन्दगी पर भारी है हर एक सांस, नहीं बची है कोई आस..

👍👍
ReplyDeleteLet’s all count our blessings 🙏🙏
❤️
ReplyDeleteexcellent
ReplyDeleteVery true
ReplyDeleteGreat madam.
ReplyDeleteBahaut hi sahi Likha hai ma'am Aapne..yehi hakikat hai..kab tak saanse aur apno ka sath hai ..koi kch ni bharosa..
ReplyDeleteसही कहा आपने,परंतु ऐसे समय में भी जो लोग दवाइयों , ऑक्सीजन और आवश्यक वस्तुओं की ब्लैक कर रहे हैं उनकी आत्मा पर यह पंक्तियों बेमानी हैं
ReplyDeleteUnke paas to atma hi nahi hai.
DeleteVery good
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