Happiness

   




       ख़ुशी

मै परेशान, मै परेशान, मै बहुत परेशान

हर कोई कहता है मै बहुत  परेशान 

शायद ढूंढ रहा है हर कोई ख़ुशी, कहीं तो मिलेगी ये ख़ुशी,

शायद गुम है किसी कोने मे ये ख़ुशी,

ख़ुशी क्या कोई चीज है जो मिल जाएगी किसी कोने मे,

इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग!

भूखे को मिलती हे खुशी दो रोटी मे,

नंगे को मिलती हे ख़ुशी दो कपड़ो  मे

प्यासे को मिलती है ख़ुशी दो घूँट पानी मे

ठण्ड से सिकुड़ते हुए इंसान को मिलती हे ख़ुशी आशियाना मिल जाने मे

स्टूडेंट को मिलती है ख़ुशी अच्छे मार्क्स आने मे

बूढ़े माँ बाप को मिलती है ख़ुशी बच्चों के  प्यार के दो बोल मे

नेताओं को मिलती है ख़ुशी कुर्सी मिल जाने मे

काम से घर थके हुए आने पर मिलती है ख़ुशी पत्नी और बच्चों की प्यारी मुस्कान मे

क्योंकि इस ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग!

नहीं है अंत इस ख़ुशी का जो मिलती है भौतिक सुख सुविधाओं  मे

ढूढना है  गर इस ख़ुशी को, तो ढूंढो अपने अंदर

कहीं नहीं है छुपी,ये ख़ुशी किसी कोने मे

ख़ुशी है छुपी यहीं अपने अंदर क्योंकि ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग!

ख़ुशी मिलती है चिंता छोड़ देने मे

ख़ुशी मिलती है क्रोध छोड़ देने मे

ख़ुशी मिलती हे  ईर्ष्या छोड़ देने में

ख़ुशी मिलती है संतोष और प्यार से जीने मे

ख़ुशी मिलती है आस्था,सब्र और विश्वास से जीने मे

ख़ुशी मिलती है मीठी बोली बोलने में

ख़ुशी है छुपी यहीं अपने अंदर क्योंकि ख़ुशी के है मायने सब के अलग अलग!

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