दस्तूर

                       


                                   दस्तूर

यही है दस्तूर ज़माने का ,यही है दस्तूर ज़माने का

हर बात पर सब कहते है यही है दस्तूर ज़माने का!

Mask पहनो,sanitize करो,और करो

Social distancing maintain,

यही है दस्तूर कोरोना का!

मॉ बाप को छोड़ अकेला बस जाएँ बाहर विदेशों में 

यही है दस्तूर ज़माने का!

बात बात पर सड़कों पर झगड़ा करे

और करे मारपिटाई ,यही है दस्तूर ज़माने का!

न आपस में बात करे ,न बोले सुख दुख के दो बोल

बस करे whatsapp पर चैट ,यही है दस्तूर ज़माने का!

सब के अपने कमरे ,अपने टीवी

और हैअपने mobile फ़ोन ,यही है दस्तूर ज़माने का

संयुक्त परिवार में होकर भी रहते है सब अपनेपन से दूर

बंद है सब अपने अपने  कमरों में ,यही है दस्तूर ज़माने का!

न कोई साथी न कोई संगी,

सब की अपनी चिंता अपने पास

यही है दस्तूर ज़माने का!

जब देता नहीं कोई साथ ,तो बनते है डिप्रेशन जैसी बीमारी के शिकार

फिर कहते है यही है दस्तूर ज़माने का ,यही है दस्तूर ज़माने क

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