वाणी
वाणी वाणी है,मुख से निकले हुए कुछ शब्द जो मीठी भी होते है, और कडवे भी होते है। शब्द तीर भी है, तलवार भी है कर देते हैं रिश्ते तार तार, कर देते हैं आत्मा छलनी बार बार। शब्द घाव भी है, शब्द मरहम भी है। शब्द देते ठऺडे पानी सी शीतलता भी, लगते फूलों के झरने से। शब्द करेले से कडवे भी, और चीनी से मीठे भी। रिश्तो में घोलते कडवाहट भी और रिश्तो मे घोलते मिठास भी। जैसे होते नहीं वापस कमान से निकले हुए तीर वैसे होते नहीं वापस मुख से निकले हुए शब्द। इस लिए कहते हैं, बोलने से पहले दस बार सोचो। अच्छा सोचो, अच्छा बोलो।