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Showing posts from July, 2020

ज़िंदगी(a big opportunity)

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ज़िंदगी (एक मौक़ा) ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न मानना कभी हार,  हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार, कर लो इसका एतबार न डरना किसी परछाईं से ,न डरना किसी खाई से न डरना कभी ऊँचाई से ,न डरना कभी गहराई से बना लो इसे अपना हथियार चलो सीना तान,बन के हिम्मतवार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! करते है suicide जो ,वो होते है कायर, मान लेते है हार! आता है ये समय सब की ज़िंदगी में बार बार डूबती है नैया ,खाती है हिचकोले कई बार पर मानना नहीं हार, हो जाएगी नैया पार सीखो सबक़ उनसे ,जिन्होंने मानी नहीं कभी हार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार ,कर लो इसका एतबार! आती है परेशानी बहुत बार, डूबता है मन कई बार देते है लोग बुराई बहुत बार, लगती है ज़िंदगी बेकार पर तुम न मानना कभी हार ,हो जाएगा बेड़ा पार ज़िंदगी देती है मौक़े हज़ार कर लो इसका एतबार !

My dear father

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A small tribute to him as today he left us two years back🙏🙏🙏🙏         मेरे प्यारे पापा खुदा की जीवित प्रतिमा को कहते है पिता जिनकी उगली पकड़कर चलना सीखा जिनसे ज्ञान और शिक्षा पाकर जीना सीखा जिनके आशीवाद से सफलता पाई एेसे प्यारे थे मेरे पिता ! मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए  सबकुछ सह जाते थे सब भाईबहनो कोडॉटते और बड़ों से लड़ जाते थे  एेसे प्यारे थे मेरे पिता ! उनके जैसा कोई नहीं इस दुनिया में  भगवान का दूसरा रुप थे मेरे पिता हर दुख ख़ुद सहते थे हर ज़िद हमारी पूरी करते थे एेसे थे मेरे प्यारे पिता !  सारे रिश्ते उनके दम से ,सारी बातें उनसे थीं सारे घर के दिल की धड़कन ,सारे घर की जान थे मेरे प्यारे पिता ! आज मेरी यादों में ,मेरे दिल में  बसे है मेरे प्यारे पिता मेरी हिम्मत ,मेरा ग़रूर  मेरा अभिमान है मेरे प्यारे पिता !

भूख

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        भूख भूख है लगी सभी को. किसी को किसी की ,किसी को किसी की भूखे को रोटी की ,नंगे को कपडे की खुले मैं  रहने वालों को छत की अनपढ़ को शिक्षा की बेरोज़गारों को रोजग़ार की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की साधु को भक्ति और भगवान की नेताओं को कुसी की  अभिनेताओं को नाम की अमीरों को और पैसों की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की देशभक्तों को देश के सम्मान की सीमा पर तैनात सिपाही को दुश्मन पर जीत की शिक्षक को ज्ञान की और  बुढ़ापे में प्यार और साथ की भूख है लगी सभी को किसी को किसी की,किसी को किसी की सब पूछते है सवाल क्या है अंत इस दौड़ का मैं कहती हू संतोष और विश्वास  ही अंत है इस होड़ का भूख है लगी सभी को किसी को किसी की ,किसी को किसी की

ग़लती

        ग़लती न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती किसकी ग़लती उसकी ग़लती! जब बच्चे भूख से रोए .तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! जब आवारा हो जाए ,तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! जब नंबर कम आए ,तो किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती किसकी ग़लती उसकी ग़लती! बेटा ग़लती करे ,तो बहू कहे  किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! बहू ग़लती करे ,तो बेटा कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! पति ग़लती करे ,तो बच्चे कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! बेटी ससुराल मे ग़लती करे ,तो सास कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! भाई भाई लडाई करे ,तो सब कहे किसकी ग़लती मॉ की ग़लती! न तेरी ग़लती, न मेरी ग़लती किसकी ग़लती ,उस भगवान की ग़लती जिसने मॉ बनाई, न बनाता मॉ ,न होती ग़लती! न तेरी ग़लती ,न मेरी ग़लती  किसकी ग़लती ,उसकी ग़लती!

डर

*डर* डर डर डर किसका डर बीमारी का डर ,नौकरी जाने का डर बॉस की डॉट का डर ,बीबी से लडाई का डर सीमा पर शहादत का डर ऑतकी हमले का डर डर डर डर किसका डर! बुढ़ापे में मौत का डर ,अकेलेपन का डर  युवाओं को नौकरी जाने का डर बालकों को नबर कम आने का डर औरतो को घर चलाने का डर डर डर डर किसका डर! रिशतेदारो का बुरा मानने का डर किशते समय पर न भर पाने का डर पड़ोसी से पाकिग़ पर लड़ाई का डर जायदाद न मिलने का डर और इस समय हर तरफ़ क्रोरोना का डर डर इस तरह से हावी है हम पर कि अब लगने लगा है अपने डर से भी डर डर डर डर किसका डर !                                       इंदू